(जिला संयोजक शिवराज ठाकुर) कोंडागांव
संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
राज्य कर्मचारियों में भारी आक्रोश: “डीए की घोषणा तो हुई, पर एरियस का क्या? आईएएस और कर्मचारियों के बीच भेदभाव कब तक?”
उजाला टुडे कोंडागांव 20 जनवरी 2026- रायपुर। जिला संयोजक शिवराज ठाकुर कोंडागांव ने बताया कि, राज्य सरकार द्वारा हाल ही में घोषित महंगाई भत्ते (DA) को लेकर प्रदेश के कर्मचारियों में खुशी से ज्यादा नाराजगी देखी जा रही है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि केंद्र के समान डीए की घोषणा केवल कागजी आंकड़ा है, क्योंकि वास्तविक रूप में उन्हें महीनों के बकाया (एरियर्स) का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
1.एरियर्स की राशि का बड़ा नुकसान
कर्मचारियों ने गणित समझाते हुए बताया कि यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 50,000 रुपये है, तो जुलाई से दिसंबर तक 3% की दर से उन्हें हर महीने 1500 रुपये का नुकसान हुआ है। इस प्रकार, पिछले 6 महीनों में एक अकेले कर्मचारी को 9,000 रुपये की चपत लग चुकी है। कर्मचारियों का कहना है कि यह छोटी दिखने वाली राशि समय के साथ एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बनती जा रही है।
2. केंद्र बनाम राज्य: घोषणा और देय तिथि का अंतर
विवाद की मुख्य जड़ डीए लागू होने की तिथि है। केंद्र सरकार जब भी डीए बढ़ाती है, वह भले ही उसकी घोषणा देर से करे (जैसे होली के आसपास), लेकिन उसे पिछली तारीख (जनवरी या जुलाई) से एरियस सहित लागू करती है। इसके विपरीत, राज्य में डीए की घोषणा तो होती है, लेकिन पिछला बकाया खा लिया जाता है, जिससे कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
3. “दोहरा मापदंड”: आईएएस बनाम राज्य कर्मचारी
कर्मचारियों का सबसे तीखा सवाल व्यवस्था में मौजूद भेदभाव को लेकर है। उनका आरोप है कि:
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- राज्य में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) संवर्ग के अधिकारियों को केंद्र के नियम के अनुसार देय तिथि से ही महंगाई भत्ता मिलता है।
- वहीं, राज्य के अन्य कर्मचारियों को महीनों इंतजार कराया जाता है और अंत में एरियर का भुगतान भी नहीं किया जाता।
कर्मचारी संगठनों का पक्ष:
“कभी 8 महीने तो कभी 9 महीने का डीए रोककर दिया जाता है। इस बार भी 6 महीने का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। जब राज्य एक है, तो आईएएस अधिकारियों और आम कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते के नियम अलग-अलग क्यों हैं?”
4. बढ़ती आर्थिक मार
महंगाई के इस दौर में कर्मचारी इस विलंब को “आर्थिक शोषण” की संज्ञा दे रहे हैं। उनका कहना है कि देय तिथि से डीए न मिलना उनके परिवार के बजट को बिगाड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस बढ़ते असंतोष को देखते हुए एरियर भुगतान पर कोई सकारात्मक निर्णय लेती है या कर्मचारियों का यह विरोध और उग्र रूप धारण करेगा।


