- जब गूँजा राष्ट्रपति भवन में दंतेवाड़ा का नाम… ‘बड़ी दीदी’ डॉ. बुधरी ताती को मिला पद्मश्री, गर्व से झूम उठा पूरा बस्तर

उजाला टुडे न्यूज
26 मई 2026
संवाददाता फलेश्वरी (रितु साहू)
संघर्ष, सेवा और समर्पण की अद्भुत कहानी को मिला देश का सर्वोच्च सम्मान, आदिवासी अंचल की बेटी बनी पूरे भारत की प्रेरणा।
दंतेवाड़ा। कभी बस्तर के दूर-दराज़ गांवों में चुपचाप सेवा का दीप जलाने वाली एक महिला का नाम जब राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार में पूरे सम्मान के साथ गूँजा, तो मानो पूरा दंतेवाड़ा भावुक हो उठा। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जैसे ही राष्ट्रपति के हाथों ‘बड़ी दीदी’ डॉ. बुधरी ताती ने पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया, वैसे ही बस्तर की वर्षों पुरानी सेवा, संघर्ष और समर्पण की कहानी पूरे देश के सामने एक नई पहचान बनकर उभरी।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस मिट्टी का सम्मान है जहाँ इंसानियत आज भी सबसे बड़ा धर्म मानी जाती है। आदरणीय बुधरी ताती ने अपने जीवन का हर अध्याय समाज के सबसे कमजोर, उपेक्षित और जरूरतमंद लोगों के नाम लिखा। उन्होंने उन गाँवों तक शिक्षा की रोशनी पहुँचाई जहाँ उम्मीदें धुंधली पड़ चुकी थीं, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया, बेटियों को सपने देखने का हौसला दिया और आदिवासी समाज को विकास की नई राह दिखाई।
चार दशकों से अधिक समय तक बिना किसी प्रचार-प्रसार के उन्होंने सेवा का ऐसा इतिहास रचा, जिसकी गूंज आज पूरे देश में सुनाई दे रही है। सैकड़ों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जनजागरण करना तथा सामाजिक चेतना को नई दिशा देना उनके जीवन का मिशन बन गया। यही कारण है कि बस्तर की जनता उन्हें केवल समाजसेविका नहीं, बल्कि स्नेह और विश्वास का दूसरा नाम—’बड़ी दीदी’—मानती है।
पद्मश्री सम्मान की घोषणा होते ही दंतेवाड़ा से लेकर पूरे बस्तर अंचल में खुशी की लहर दौड़ गई। जगह-जगह लोगों ने मिठाइयाँ बाँटी, शुभकामनाएँ दीं और इस ऐतिहासिक उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के गौरव का क्षण बताया। हर जुबान पर एक ही बात थी—”आज सम्मान केवल समाजसेविका दीदी बुधरी ताती का नहीं, बल्कि पूरे बस्तर के स्वाभिमान का हुआ है।”यह उपलब्धि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मानते हैं कि सच्ची सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती। वर्षों तक निस्वार्थ भाव से किया गया हर छोटा प्रयास एक दिन इतिहास बनता है, और जब इतिहास लिखा जाता है तो उसमें ऐसे ही नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होते हैं।दंतेवाड़ा की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महानता बड़े शहरों में नहीं, बल्कि उन लोगों के दिलों में जन्म लेती है जो बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए जीते हैं। ‘बड़ी दीदी’ डॉ. बुशरी ताती का पद्मश्री सम्मान आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि सेवा का हर कदम एक दिन पूरे राष्ट्र का गौरव बन सकता है।
