संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
विधायक निवास के नाम पर नकटी गांव में गरीबों के आशियाने उजाड़े, बरसात में खुले आसमान के नीचे आए परिवार: सीपीआई
- बिना पूर्व सूचना और मुआवजे के कार्रवाई करना सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण: तिलक पांडे
- सीपीआई ने की न्यायिक जांच और तत्काल पुनर्वास की मांग, आंदोलन की दी चेतावनी
उजाला टुडे कोंडागांव 02 जुलाई 2026–कोण्डागांव छत्तीसगढ़ के नकटी गांव की पुरानी बसाहट में दशकों से रह रहे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के मकानों को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने का मामला अब गरमा गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) छत्तीसगढ़ राज्य इकाई ने इस कार्रवाई को पूरी तरह जन-विरोधी, क्रूर और बेहद निंदनीय करार दिया है। सीपीआई के राज्य सचिव मंडल सदस्य कामरेड तिलक पांडे ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार और प्रशासन के इस कृत्य की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।
बरसात के मौसम में बिना सूचना उजाड़ा आशियाना
कामरेड तिलक पांडे ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने विधायकों के निवास (विधायक दल के आवास) बनाने के नाम पर नकटी गांव की पुरानी बसाहट में रह रहे परिवारों के घरों को अचानक मलबे में तब्दील कर दिया। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा, “भारी बरसात के मौसम में की गई इस कार्रवाई के कारण पीड़ित परिवारों के मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन ने न तो कोई पूर्व सूचना दी, न वैकल्पिक व्यवस्था की और न ही पुनर्वास का कोई आश्वासन दिया।”
सामान बचाने और कोर्ट जाने तक का नहीं मिला मौका
सीपीआई नेता ने आरोप लगाया कि अचानक बुलडोजर चलाए जाने के कारण गरीब परिवारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घरों के भीतर रखा घरेलू सामान, राशन, कपड़े और अन्य जरूरी सामग्रियां मलबे में दबकर नष्ट हो गईं। प्रशासन ने इतनी जल्दबाजी दिखाई कि पीड़ित परिवार न तो अपना सामान बचा पाए और न ही न्याय के लिए अदालत की शरण ले सके। यह सीधे तौर पर शासन की क्रूरता और संवेदनहीनता का स्पष्ट उदाहरण है।
सीपीआई की मुख्य मांगें:
कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- तत्काल मुआवजा व पुनर्वास: प्रभावित परिवारों को तुरंत उचित मुआवजा, स्थाई आवास और पुनर्वास की मुकम्मल व्यवस्था दी जाए।
- पक्के मकान या किराया सहायता: बरसात के मौसम को देखते हुए बेघर हुए लोगों को तत्काल पक्के मकान दिए जाएं या वैकल्पिक रूप से किराया सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।
- न्यायिक जांच: इस पूरी दमनकारी घटना की न्यायिक जांच हो और जिम्मेदार दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- भविष्य के लिए गारंटी: विकास के नाम पर भविष्य में किसी भी परिवार को बिना पूर्व सूचना और पुनर्वास के बेघर न किया जाए।
सत्ता के स्वार्थ के लिए जनता को बेघर करना दुर्भाग्यपूर्ण
तिलक पांडे ने जनता से आत्मचिंतन करने की अपील करते हुए तीखे सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि क्या जनता अपने प्रतिनिधियों को इसलिए चुनती है कि वे सत्ता में आकर गरीबों को बेघर करें? उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को आम जनता के दुख-तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है। वर्ष 2003 से 2018 के बीच जिला मुख्यालयों में आलीशान भाजपा कार्यालयों का निर्माण और इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए हजारों करोड़ रुपये बटोरना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आज संविधान और कानूनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसका नतीजा नकटी गांव की यह दर्दनाक घटना है। यदि आम जनता अब भी जागरूक नहीं हुई, तो ऐसी घटनाएं अन्य गांवों में भी दोहराई जा सकती हैं। अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआई हमेशा गरीबों, किसानों और मजदूरों के हक के लिए संघर्ष करती आई है और नकटी गांव के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक शासन पर दबाव बनाएगी।

