
संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
शहर में ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर बनीं सरस्वती नेताम
उजाला टुडे कोंडागांव, 09 सितम्बर 2025/ छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले की रहने वाली सरस्वती नेताम ने अपनी मेहनत और ‘दीदी ई-रिक्शा योजना’ के सहारे आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। कभी मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने वाली सरस्वती आज गर्व से शहर की सड़कों पर अपना खुद का ई-रिक्शा चलाती हैं।
उनके जीवन में बदलाव तब आया, जब उन्हें स्थानीय विधायक लता उसेंडी से ‘दीदी ई-रिक्शा योजना’ के बारे में पता चला। श्रम विभाग की यह योजना उन महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई है, जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं। इस योजना के तहत, जरूरतमंद महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ₹50,000 का अनुदान दिया जाता है।
पात्रता जांच के बाद, सरस्वती को अनुदान मिला, जिससे उन्होंने एक ई-रिक्शा खरीदा। शुरुआत में गाड़ी चलाने में थोड़ी दिक्कतें आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी लगन और मेहनत से उन्होंने न सिर्फ ई-रिक्शा चलाना सीखा, बल्कि आज वह इससे हर महीने ₹15,000 से ₹20,000 तक की कमाई भी कर रही हैं।
सरस्वती की यह आय उनके परिवार के लिए सहारा बन गई है। वह कहती हैं, “इस योजना ने मुझे एक नई राह दिखाई है। आज मैं आत्मनिर्भर हूं और अपने परिवार का सहारा बन पाई हूं।” उन्होंने इस मदद के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया।
सरस्वती की यह कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो जीवन की चुनौतियों से लड़कर आगे बढ़ना चाहती हैं। यह दिखाती है कि अगर हौसले बुलंद हों और सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिले, तो कोई भी अपने सपनों को सच कर सकता है।

