
संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
कोण्डागांव जिला अस्पताल ने रचा इतिहास: लेप्रोस्कोपिक पद्धति से हुआ पहला सफल किडनी ऑपरेशन
उजाला टुडे कोण्डागांव, 12 सितंबर 2025: कोण्डागांव जिला अस्पताल ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 4 सितंबर 2025 को, अस्पताल के डॉक्टरों ने पहली बार लेप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग कर एक मरीज की किडनी का सफल ऑपरेशन किया। यह न केवल जिले के लिए एक ऐतिहासिक दिन था, बल्कि एक आर्थिक तंगी से जूझ रही महिला के लिए भी एक नई उम्मीद लेकर आया।
गरीबी और बीमारी से जूझ रही महिला को मिला नया जीवन
कोण्डागांव के बाजारपारा की 35 वर्षीय सावित्री कोर्राम, जिनके पति का निधन हो चुका है, अपने चार बच्चों का पालन-पोषण झाड़ू-पोंछा करके करती हैं। दो साल पहले, उन्हें गंभीर किडनी रोग का पता चला। विशाखापत्तनम में इलाज का खर्च सुनकर वे निराश होकर वापस लौट आईं।
जब उन्होंने कोण्डागांव जिला अस्पताल में डॉक्टरों से संपर्क किया, तो जांच में पता चला कि उनकी एक किडनी पूरी तरह से खराब हो चुकी है। सर्जन डॉ. एस. नगुलन ने सामान्य ऑपरेशन के बजाय लेप्रोस्कोपिक पद्धति से ऑपरेशन करने का साहसिक निर्णय लिया, जिसमें चीरा और संक्रमण का खतरा कम होता है।
टीमवर्क से मिली सफलता
4 सितंबर को, डॉ. एस. नगुलन के नेतृत्व में एक टीम ने तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में सावित्री की खराब किडनी को सफलतापूर्वक निकाला। इस टीम में डॉ. शैलेश कुमार, डॉ. अनिल देवांगन, डॉ. कृष्णा मरकाम, और ओटी स्टाफ स्वप्नप्रिया, पुष्पलता कुंवर, हेमंत मंडावी, संजना जैन, रामेश्वरी, अर्चना, साधना, और रीना शामिल थीं।
ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और सावित्री अब तेजी से ठीक हो रही हैं। सावित्री ने कहा, “पहले लगा था कि गरीबी और बीमारी मेरी जिंदगी खत्म कर देगी। लेकिन जिला अस्पताल और आयुष्मान कार्ड ने मुझे नया जीवन दिया है।”
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
यह सफलता जिला प्रशासन की दूरदर्शिता का परिणाम है। कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. चतुर्वेदी, और सिविल सर्जन डॉ. प्रेम मंडावी के प्रयासों से यह ऐतिहासिक ऑपरेशन संभव हो पाया।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएँ लगातार मजबूत हो रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अब लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े और जिला स्तर पर ही आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हों।

