मछली पालन को बढ़ावा: 30 कृषकों को मिला उन्नत प्रशिक्षण, झींगा पालक किसानों को बीज वितरण
कोंडागांव में कलेक्टर के मार्गदर्शन में तीन दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन; ग्रामीण आजीविका सुधारने पर ज़ोर
उजाला टुडे कोण्डागांव 10 अक्टूबर 2025- कोंडागांव जिले में मछली पालन (Fisheries) को आधुनिक और लाभदायक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कलेक्टर नुपूर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में, शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र कोपाबेड़ा में तीन दिवसीय तकनीकी उन्नयन प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 30 मत्स्य कृषकों को उन्नत तकनीक सिखाई गई, और साथ ही झींगा पालक कृषकों को मछली बीज का वितरण भी किया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और मुख्य विषय
यह तीन-दिवसीय प्रशिक्षण 07 अक्टूबर से 09 अक्टूबर तक चला। इसका मुख्य उद्देश्य कृषकों को आधुनिक विधि से मछली पालन के लिए प्रेरित करना, उनकी आय में वृद्धि करना और अंततः ग्रामीण आजीविका में सुधार लाना था।
सहायक मत्स्य अधिकारी योगेश कुमार देवांगन ने कृषकों को निम्नलिखित विषयों पर विस्तार से तकनीकी ज्ञान प्रदान किया:
- तालाब की तैयारी और प्रबंधन।
- मछली बीज का चुनाव और संचयन (Stocking) विधि।
- मत्स्य आहार का सही उपयोग और प्रबंधन तकनीकें।

बस्तर संभाग में झींगा पालन को प्रोत्साहन
यह पहल छत्तीसगढ़ शासन मछली पालन विभाग के एक बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत बस्तर संभाग में झींगा पालन (Prawn Farming) को बढ़ावा देने के लिए पायलेट प्रोजेक्ट लागू किया गया है। यह प्रोजेक्ट संभाग के 07 जिलों में लागू है और कोंडागांव में प्रथम चरण में 30 कृषकों को चयनित किया गया है।
झींगा (प्रान्स) की खासियत
जिसे सामान्य रूप से ‘फ्रेश वाटर झींगा’ या ‘चिंगड़ी’ भी कहा जाता है, यह अपने अधिक प्रोटीन और उच्च बाज़ार मूल्य के कारण किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। वर्तमान में, इसका बाज़ार भाव औसतन 400 से 500 रुपये प्रति किलो है।
कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
प्रशिक्षण और बीज वितरण कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों में जिला पंचायत के उपाध्यक्ष हीरासिंह नेताम, जिला पंचायत सदस्य नंदलाल राठौर, जनपद अध्यक्ष कोंडागांव अनीता कोर्राम, और अन्य गणमान्य नागरिक तथा विभागीय अधिकारी शामिल थे। मत्स्य पालन विभाग से उप संचालक एम.एल. राणा और सहायक मत्स्य अधिकारी योगेश कुमार देवांगन उपस्थित रहे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल कृषकों को आधुनिक ज्ञान से सशक्त करेगा, बल्कि झींगा पालन को व्यावसायिक रूप से सफल बनाकर कोंडागांव के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान करेगा।



