संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव विशेष पड़ताल: विकास के नाम पर ‘धीमा जहर’ परोस रहा ठेकेदार! हर निवाले में धूल का स्वाद, जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़
उजाला टुडे कोंडागांव 23 दिसम्बर 2025- कोंडागांव: शहर में जल जीवन मिशन की पाइपलाइन बिछाने का काम अब जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। पाइपलाइन से घर-घर पानी पहुँचेगा या नहीं, यह तो भविष्य की बात है, लेकिन वर्तमान में ठेकेदार की लापरवाही ने पूरे कोंडागांव के लोगों के फेफड़ों में ‘धूल’ जरूर पहुँचा दी है। शहर का कोई भी कोना ऐसा नहीं बचा है जहाँ ठेकेदार की मनमानी का ‘गुबार’ न उड़ रहा हो।
घड़ी चौक से मंडी रोड तक: धूल का ऐसा तांडव पहले कभी नहीं देखा
शहर के सबसे व्यस्त मार्ग— घड़ी चौक, कांग्रेस भवन रोड, कोर्ट चौक, बाजार रोड और मंडी रोड—आज धूल के रेगिस्तान बन चुके हैं। निर्माण के नाम पर सड़कों को खोदकर मलबे को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
नियमों की धज्जियां: निर्माण कार्य के दौरान हवा में धूल न उड़े, इसके लिए नियमित पानी के छिड़काव का कड़ा नियम है। लेकिन यहाँ ठेकेदार की ‘हठधर्मिता’ ऐसी है कि सड़कों पर पानी की एक बूंद तक नहीं डाली जा रही।
प्रशासनिक मौन: शहर की जनता धूल फांक रही है और जिम्मेदार अधिकारी दफ्तरों में बैठकर तमाशा देख रहे हैं। आखिर इस लापरवाह ठेकेदार पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सब्जी से लेकर फास्ट फूड तक… सब कुछ प्रदूषित!
यह सिर्फ धूल नहीं, बल्कि बीमारी का न्योता है:
कोर्ट चौक के पास की धूल भरी सड़क: यहाँ बिकने वाली ताजी सब्जियां अब धूल की मोटी परत के नीचे दबी हैं। ग्राहक विटामिन की जगह संक्रमण घर ले जा रहे हैं।
फास्ट फूड प्रेमियों की सेहत पर वार: सड़क किनारे गुपचुप, चाट और चाउमीन बेचने वाले दुकानदार परेशान हैं। जैसे ही कोई गाड़ी गुजरती है, धूल का बवंडर सीधे खाने की प्लेटों में समा जाता है। लोग अनजाने में कंक्रीट और मिट्टी के बारीक कण निगल रहे हैं, जिससे गला खराब और सांस की बीमारियां फैल रही हैं।
ठेकेदार पर हो सीधी कार्रवाई, दर्ज हो केस!
अब कोंडागांव की जनता केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ‘कार्रवाई’ चाहती है। शहर के व्यापारियों और नागरिकों की प्रशासन से दो टूक मांग है:
लापरवाह ठेकेदार पर हो FIR: सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालने और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में ठेकेदार पर तत्काल केस दर्ज किया जाए।
भुगतान पर तुरंत रोक: जब तक पूरे शहर की सड़कों से मलबा नहीं हटता और नियमित पानी का छिड़काव शुरू नहीं होता, तब तक ठेकेदार का सारा भुगतान तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
मशीनों से हो सफाई: सड़कों के किनारे जमा धूल को केवल झाड़ू से नहीं, बल्कि आधुनिक मशीनों से साफ कराया जाए ताकि जनता को इस ‘नरक’ से मुक्ति मिले।
निष्कर्ष: जनता की जान सस्ती, ठेकेदार का मुनाफा बड़ा?
विकास जरूरी है, लेकिन जनता की लाशों पर नहीं। कोंडागांव की जनता अब ‘धूल’ नहीं, अपना ‘स्वच्छ वातावरण’ वापस चाहती है। यदि ठेकेदार के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता खुद सड़कों पर उतरकर इस ‘धीमे जहर’ के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन करेगी।


