संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
धरती का ‘ग्रीन सिग्नल’: हात्मा के स्कूल से शुरू हुई 10,000 पौधों की ‘फैक्ट्री’
उजाला टुडे कोंडागांव 30 अप्रैल 2026-कोंडागांव/बडेराजपुर जब इरादे नेक हों और हाथों में मिट्टी का साथ हो, तो बंजर जमीन भी मुस्कुराने लगती है। कुछ ऐसा ही नजारा आज शासकीय हाई स्कूल हात्मा में देखने को मिला, जहाँ किताबों के साथ-साथ अब ‘पर्यावरण की वर्णमाला’ पढ़ी जा रही है। स्कूल के इको क्लब ने ‘हम हैं पर्यावरण मित्र’ के संकल्प के साथ एक ऐसे महाअभियान का आगाज़ किया है, जो आने वाले समय में क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा।
मिशन 10,000: जेब में बीज, दिल में हरियाली
यह महज एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि एक ‘हरित क्रांति’ है। स्कूल के छात्र अब अपने साथ खिलौने या गैजेट्स नहीं, बल्कि इमली, जामुन, नीम और आम के बीज लेकर स्कूल पहुँच रहे हैं। लक्ष्य बड़ा है— एक महीने के भीतर 10,000 सीड बॉल्स तैयार करना।
कुरूद की ‘नेशनल वर्कशॉप’ का बनेगा पावर सेंटर
आगामी 10 मई को कुरूद में होने वाली ‘प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा’ की राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए हात्मा स्कूल ‘सप्लाई चेन’ का काम करेगा। यहाँ से तैयार होकर जाने वाले बीज देश भर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए प्रेरणा बनेंगे।
क्यों खास है हात्मा का यह ‘ग्रीन मॉडल’?
- नो फोटो-ऑप, ओनली एक्शन: अक्सर लोग पौधा लगाकर भूल जाते हैं, लेकिन यहाँ के ‘इको वॉरियर्स’ हर 15 दिन में बीजों की ‘हेल्थ रिपोर्ट’ चेक करेंगे।
- नेचर की सर्जिकल स्ट्राइक: मानसून शुरू होते ही इन सीड बॉल्स को खाली मैदानों और खलिहानों में ‘लॉन्च’ किया जाएगा।
- जीरो वेस्ट मैनेजमेंट: घर में फेंके जाने वाले फलों के बीजों को अब ‘संजीवनी’ की तरह सहेजा जा रहा है।
“हम माली भी हैं और रक्षक भी”
अभियान के सूत्रधार और इको क्लब प्रभारी संदीप कुमार सेन का कहना है कि— “हम बच्चों को सिर्फ थ्योरी नहीं पढ़ा रहे, हम उन्हें भविष्य का रक्षक बना रहे हैं। हमारा लक्ष्य 100% सफलता का है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक ये बीज, पेड़ों में तब्दील न हो जाएँ।”
जन-आंदोलन की पुकार
हात्मा की गलियों में अब चर्चा है कि प्रकृति को बचाने के लिए किसी बड़े बजट की नहीं, बस एक छोटी सी शुरुआत की जरूरत है। ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इस मुहीम को अपने हाथों में ले लिया है।
अब बारी आपकी है… क्या आपने आज एक भी बीज सहेजा?

