संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
मसोरा में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विधिक जागरूकता शिविर संपन्न: श्रमिकों को बताए गए उनके अधिकार
उजाला टुडे कोंडागांव 01 मई 2026-कोण्डागांव: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के गौरवशाली अवसर पर ग्राम पंचायत मसोरा में श्रमिकों के लिए एक विशेष एक दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के दिशा-निर्देशानुसार आयोजित हुआ।
विधिक मार्गदर्शन और नेतृत्व
शिविर का आयोजन माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण), श्री खिलावन राम रिंगरी के मार्गदर्शन एवं सचिव, सुश्री गायत्री साय के कुशल नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिधारक अधिवक्ता सुरेन्द्र भट्ट के साथ अधिकार मित्र रंजन बैध एवं लोकेश यादव उपस्थित रहे।
समान कार्य, समान वेतन: शोषण के विरुद्ध आवाज
शिविर को संबोधित करते हुए अधिवक्ता सुरेन्द्र भट्ट ने श्रमिकों के मौलिक अधिकारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
”प्रत्येक श्रमिक को समान कार्य के लिए समान वेतन पाने का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी श्रमिक का शोषण होता है, तो वह नि:शुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का हकदार है।”
प्रमुख योजनाओं की दी गई जानकारी
शिविर के दौरान ग्रामीणों और श्रमिकों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई:
- न्यूनतम मजदूरी अधिनियम: कार्य के बदले तयशुदा उचित पारिश्रमिक की जानकारी।
- सामाजिक सुरक्षा: बोनस, पेंशन योजनाएं और कार्यस्थल पर सुरक्षा के मानक।
- डिजिटल पंजीकरण: ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन के लाभ और आयुष्मान भारत योजना से मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष सत्र
महिला श्रमिकों के लिए एक पृथक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उनके कानूनी अधिकारों को रेखांकित किया गया। इसमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण, मातृत्व अवकाश (Maternity Benefit) और महिला सुरक्षा से जुड़े कड़े कानूनों के बारे में जागरूक किया गया ताकि वे निर्भीक होकर कार्य कर सकें।
जनभागीदारी
इस जागरूकता अभियान में ग्राम पंचायत मसोरा के सरपंच, सचिव सहित बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। शिविर के अंत में ग्रामीणों की शंकाओं का समाधान भी विधिक विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और कृषकों को कानूनी रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने अधिकारों का उपयोग कर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

