बैलाडीला की पहाड़ियों में बाहरी राज्यों के लोग कर रहे रोजगार, जबकि छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवा नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहे — आखिर कब मिलेगा अपने ही क्षेत्र में अधिकार

उजाला टुडे न्यूज
23 जून 2026
जिला संवाददाता फलेश्वरी (रितु साहू )
किरंदुल। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली बैलाडीला की पहाड़ियां आज एक ऐसे सवाल के केंद्र में हैं, जो हजारों स्थानीय युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। जिस धरती की खनिज संपदा से उद्योगों के पहिए दौड़ रहे हैं, जिस क्षेत्र के संसाधनों से निजी कंपनियां लगातार लाभ अर्जित कर रही हैं, उसी क्षेत्र के छत्तीसगढ़ के अनेक युवा रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं।
चर्चा तेजी से उठ रही है कि निजी कंपनियों, ठेका संस्थाओं और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से आए लोगों को रोजगार मिल रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ के मूल निवासी युवा अवसरों के अभाव में बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। शिक्षित, योग्य और कार्य करने के इच्छुक युवा रोजगार कार्यालयों, कंपनी गेटों और विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अपेक्षित अवसर उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं।
जब उद्योगों को यहां की भूमि, खनिज संपदा, पानी, सड़क और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, तो रोजगार के मामले में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलना स्वाभाविक और न्यायसंगत होना चाहिए। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि आखिर स्थानीय युवाओं की अनदेखी क्यों हो रही है और बाहरी राज्यों से आए लोगों को अधिक अवसर क्यों मिल रहे हैं?
बैलाडीला और किरंदुल की पहचान केवल लौह अयस्क की समृद्धि से नहीं, बल्कि यहां के मेहनतकश, प्रतिभाशाली और संघर्षशील युवाओं से भी है। यदि यही युवा अपने ही क्षेत्र में रोजगार के लिए संघर्ष करते रहें और बाहर से आए लोग अधिकांश अवसर प्राप्त करें, तो यह चिंता का विषय बनना स्वाभाविक है।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि अब समय आ गया है जब जनप्रतिनिधि, प्रशासन, एनएमडीसी प्रबंधन तथा निजी कंपनियां इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता और कौशल विकास की बेहतर व्यवस्था ही इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकती है।
आज बैलाडीला की वादियों में एक सवाल गूंज रहा है — “जब संसाधन हमारे हैं, तो रोजगार पर पहला अधिकार भी हमारा क्यों नहीं?”
“छत्तीसगढ़ के युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं और बाहरी राज्यों के लोग यहां अवसरों का लाभ उठा रहे हैं। यह केवल नौकरी का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोगों का स्थानीय अधिकार, सम्मान और भविष्य का सवाल है।”
