संपादक संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
लापरवाही का तांडव: कोंडागांव में पेटी ठेकेदार की फिर चढ़ी मासूम की बलि, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
उजाला टुडे कोंडागांव 31 जुलाई 2026-कोंडागांव: जिला मुख्यालय में प्रशासनिक ढिलाई और पेटी ठेकेदारों की घोर लापरवाही के चलते एक बार फिर एक मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ी है। ताज्जुब की बात यह है कि महज एक साल के भीतर, एक ही कार्यस्थल और एक ही ठेकेदार की लापरवाही से यह दूसरी मौत है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और नगर पालिका द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किया जाना व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
एक ही कार्य, एक ही लापरवाही और दो मासूमों की मौत
पूरा मामला कोंडागांव के नहर पारा स्थित तालाब जीर्णोद्धार कार्य से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, नगर पालिका द्वारा इस तालाब के सुंदरीकरण और निर्माण कार्य का टेंडर ‘उत्तम कोटारिया’ नामक ठेकेदार को जारी किया गया था। हालांकि, कागजों पर टेंडर किसी और के नाम रहा, लेकिन धरातल पर काम का जिम्मा पेटी ठेकेदार ‘अंकुश जैन’ को सौंप दिया गया।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कराए जा रहे इस काम में खुले छोड़े गए गड्ढे मासूमों के लिए काल बन रहे हैं। कुछ महीने पहले भी अंकुश जैन द्वारा कराए जा रहे इसी कार्य के दौरान खुले गड्ढे में डूबने से एक मासूम की मौत हो चुकी है, जिस पर काफी विवाद भी हुआ था। इसके बावजूद न तो गड्ढों को ढका गया और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए। नतीजा यह रहा कि हाल ही में एक और मासूम ने अपनी जान गंवा दी।
पेटी प्रथाम से निर्माण कार्य के स्तर पर उठे सवाल
एक ठेकेदार द्वारा टेंडर लेकर उसे दूसरे पेटी ठेकेदार को बेच देना (पेटी पर देना) अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। जब मुख्य ठेकेदार अपना मुनाफा निकालकर काम दूसरे को सौंप देता है, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का गिरना तय माना जाता है।
गौरतलब है कि उत्तम कोटारिया द्वारा इससे पहले भी राम मंदिर तालाब के जीर्णोद्धार का टेंडर लिया गया था, जिसे पेटी ठेके पर दिया गया था। उस काम की गुणवत्ता भी बेहद निम्न स्तर की रही, जो आज भी साफ देखी जा सकती है। इसके बावजूद नगर पालिका द्वारा बार-बार उसी ढर्रे पर काम बांटना अधिकारियों की मंशा पर संदेह पैदा करता है।
कब जागेगा जिला प्रशासन?
दो मासूमों की जान चले जाने के बाद भी जिला प्रशासन और नगर पालिका परिषद कोंडागांव की ओर से पेटी ठेकेदारों पर लगाम कसने या उन पर कोई सख्त कानूनी कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई गई है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर और कितने मासूमों की बलि चढ़ने के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे?
क्षेत्रवासी अब दोषी ठेकेदारों का लाइसेंस रद्द करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



