गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर श्री राघव मंदिर में गूंजा सुंदरकांड, राम-हनुमान भक्ति में डूबा वातावरण

उजाला टुडे न्यूज 20 अगस्त 2026
संवाददाता फलेश्वरी (रितु साहू)
किरंदुल नगर की सुख-शांति, समृद्धि, आरोग्यता एवं मंगलकामनाओं को लेकर गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन अवसर पर बुधवार, 19 अगस्त 2026 को श्री राघव मंदिर प्रांगण में भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का सामूहिक पाठ किया गया।
श्री राम जन कल्याण सेवा समिति, गायत्री परिवार एवं सुंदरकांड पाठ सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ शाम 7 बजे मंदिर की दैनिक 00आरती के पश्चात हुआ। श्रद्धालुओं द्वारा एक स्वर में सुंदरकांड की चौपाइयों का पाठ किए जाने से पूरा मंदिर परिसर “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। भक्तों की श्रद्धा और रामभक्ति से ओतप्रोत चौपाइयों ने वातावरण को अत्यंत दिव्य और भावपूर्ण बना दिया।
जन-जन तक रामकथा पहुंचाने वाले महान संत तुलसीदास
गोस्वामी तुलसीदास जी भारतीय संत परंपरा और हिंदी साहित्य के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने प्रभु श्रीराम के आदर्श जीवन और उनकी मर्यादा को जनसामान्य तक पहुंचाने में अमूल्य योगदान दिया। संस्कृत में वर्णित रामकथा को उन्होंने लोकभाषा अवधी में ‘श्रीरामचरितमानस’ के रूप में प्रस्तुत कर उसे घर-घर तक पहुंचाया।
उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ जीवन-मूल्य, कर्तव्य, सेवा, त्याग, प्रेम, मर्यादा और लोककल्याण का संदेश मिलता है। ‘हनुमान चालीसा’, ‘विनय पत्रिका’ और ‘गीतावली’ जैसी प्रसिद्ध रचनाएं भी उनकी भक्ति-साहित्य परंपरा से जुड़ी अमर कृतियों में गिनी जाती हैं।
गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम, माता जानकी और हनुमान जी की आराधना के साथ तुलसीदास जी की रचनाओं, चौपाइयों और उनके जीवन संदेश का स्मरण किया जाता है। आयोजन में उनकी 529वीं जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई।
सावन में सुंदरकांड पाठ का विशेष आध्यात्मिक महत्व
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को श्रीराम का अनन्य भक्त और हनुमान जी को शिवतत्त्व से जुड़ा माना गया है। ऐसे में सावन के पवित्र वातावरण में सुंदरकांड का सामूहिक पाठ शिव और रामभक्ति के अद्भुत संगम का भाव उत्पन्न करता है।
सुंदरकांड में हनुमान जी की अटूट भक्ति, साहस, बुद्धि, सेवा, समर्पण और असंभव को संभव करने के संकल्प का वर्णन मिलता है। इसी कारण श्रद्धालु इसका पाठ संकटों से मुक्ति, मनोबल, सकारात्मकता, परिवार एवं समाज में सुख-शांति तथा मंगल की कामना से करते हैं।
सुंदरकांड हमें यह संदेश भी देता है कि जब मन में प्रभु के प्रति विश्वास, लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और सेवा का भाव हो, तो बड़ी से बड़ी बाधा भी छोटी पड़ जाती है।
जब उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक साथ श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ किया तो मंदिर परिसर में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ। रामभक्ति और हनुमान भक्ति के इस संगम ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
आयोजन के माध्यम से भगवान श्रीराम एवं संकटमोचन हनुमान जी से किरंदुल नगर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, आरोग्यता, आपसी प्रेम, सद्भाव एवं सर्वमंगल की प्रार्थना की गई।
हिन्दू पंचांग की परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास जयंती श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि से जुड़ी मानी जाती है। इस पावन अवसर पर आयोजित सामूहिक सुंदरकांड पाठ ने तुलसीदास जी की रामभक्ति, उनकी साहित्यिक विरासत और समाज को दिए गए आदर्श संदेशों को पुनः स्मरण कराया l
