संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
स्वामी आत्मानंद स्कूल में एसपी ने ली साइबर सुरक्षा की क्लास, पिंक स्क्वाड ने सिखाया ‘गुड टच-बैड टच’
- साइबर फ्रॉड से बचाव के गुर सिखाए, ठगी होने पर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने की दी सलाह
- निजी जानकारी और ओटीपी साझा न करने की अपील, शिक्षकों को भी मिला सजग रहने का संदेश
उजाला टुडे कोंडागांव 02 सितंबर 2026-कोण्डागांव: बढ़ते डिजिटल अपराधों पर अंकुश लगाने और बच्चों को सुरक्षित परिवेश देने के उद्देश्य से कोण्डागांव पुलिस ने स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल (जामकोटपारा) में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से पहुंचे पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा (IPS) ने स्कूली बच्चों को साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक तरीके सिखाए, वहीं पुलिस की ‘पिंक स्क्वाड’ ने बालिकाओं को सुरक्षा, कानूनी अधिकार और ‘गुड टच-बैड टच’ की बारीकियों से अवगत कराया।
डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव: एसपी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा ने कहा कि आज के दौर में इंटरनेट और मोबाइल पढ़ाई का अहम जरिया बन चुके हैं, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही बड़े साइबर अपराध की वजह बन सकती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, ओटीपी व यूपीआई फ्रॉड, फिशिंग लिंक और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे खतरों के प्रति आगाह किया।
एसपी ने बच्चों को सुरक्षा सूत्र देते हुए कहा कि कभी भी अपना पासवर्ड, पिन या निजी तस्वीरें अजनबियों से साझा न करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी प्रकार की परेशानी या साइबर ठगी होने पर डरे बिना तुरंत माता-पिता, शिक्षकों या सीधे राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
पिंक स्क्वाड ने सिखाई आत्मरक्षा और ‘ना’ कहने की हिम्मत
कार्यशाला में कोण्डागांव पुलिस की पिंक स्क्वाड की महिला पुलिसकर्मियों ने बच्चों से सीधा संवाद किया। स्क्वाड ने बेहद सरल भाषा में विद्यार्थियों को ‘गुड टच और बैड टच’ का अंतर समझाया। बच्चों को बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति गलत नीयत से छूता है या असहज महसूस कराता है, तो चुप रहने के बजाय तुरंत ‘ना’ कहें, वहां से हटें और बिना झिझक अपने परिजनों या शिक्षकों को बताएं। इसके साथ ही बालिकाओं को छेड़छाड़, उत्पीड़न या असुरक्षित माहौल में तत्काल पुलिस सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
शिक्षकों को भी मिली डिजिटल निगरानी की जिम्मेदारी
पुलिस अधीक्षक ने उपस्थित शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों के बदलते व्यवहार और इंटरनेट की आदतों पर संवेदनशीलता से नजर रखें। ऑनलाइन उत्पीड़न या अवसाद के लक्षण दिखने पर बच्चे को डांटने के बजाय सुरक्षित मार्गदर्शन दें।
कोण्डागांव पुलिस के अनुसार, साइबर जागृति अभियान और पिंक स्क्वाड के जरिए जिले के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी ऐसे सत्र निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी जिम्मेदार और सुरक्षित डिजिटल नागरिक बन सके।



