संजय सोनपिपरे संपादक,उजाला टुडे कोंडागांव

उजाला टुडे कोंडागांव, 29 जून 2025: कोंडागांव में NH 30 हाईवे से सटे राम मंदिर तालाब के किनारे बनी लोहे की रेलिंग हल्की बारिश में अचानक धराशायी हो गई, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना ने एक और चिंताजनक पहलू को उजागर किया है: गिरने वाली रेलिंग के ठीक पास ही एक बिजली का खंभा और उसका ट्रांसफार्मर भी सड़क किनारे लगा हुआ है, जो अब सीधे खतरे की जद में आ गया है। स्थानीय लोगों ने इस घटना को घटिया निर्माण कार्य का सीधा प्रमाण बताया है।

हल्की बारिश में ध्वस्त हुई रेलिंग, बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर पर भी खतरा
जानकारी के अनुसार, राम मंदिर तालाब के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा के लिए सड़क किनारे यह लोहे की रेलिंग लगाई गई थी। हालांकि, शुक्रवार की शाम हुई हल्की बारिश भी इसे झेल नहीं पाई और रेलिंग अचानक गिर पड़ी। NH 30 जैसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग के बिल्कुल बगल में यह घटना होने से पैदल चलने वालों और सड़क पर आवाजाही करने वाले वाहनों के लिए तत्काल खतरा पैदा हो गया। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि गिरी हुई रेलिंग के ठीक पास ही एक बिजली का खंभा और उससे जुड़ा ट्रांसफार्मर भी है। रेलिंग के गिरने से यह बिजली का ढांचा भी असुरक्षित हो गया है, जिससे शॉर्ट सर्किट, बिजली के झटके या अन्य गंभीर दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ गया है। यह घटना सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी और लापरवाही को उजागर करती है।
नगरपालिका अध्यक्ष-उपाध्यक्ष मौके पर पहुंचे, त्वरित समाधान का निर्देश
घटना की सूचना मिलते ही, कोंडागांव नगर पालिका अध्यक्ष नरपति पटेल और उपाध्यक्ष जसकेतु उसेंडी तत्काल सरकारी अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए।
अध्यक्ष नरपति पटेल ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी जल्दी यह रेलिंग गिर गई। हम जल्द से जल्द इसे ठीक करवाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटना न हो।” उपाध्यक्ष जसकेतु उसेंडी ने भी अधिकारियों को इस मामले में तेजी से कार्रवाई करने को कहा।
घटिया निर्माण की शिकायत, जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय निवासियों ने इस घटना को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका आरोप है कि रेलिंग के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था और कार्य की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। लोगों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जो भी ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी इस घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं, उन पर कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर पर संभावित खतरे को देखते हुए, विद्युत विभाग को भी तुरंत इस स्थिति का आकलन करना चाहिए और आवश्यक सुरक्षा उपाय करने चाहिए।
फिलहाल, प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है और उम्मीद है कि जल्द ही क्षतिग्रस्त रेलिंग को हटाकर एक मजबूत और टिकाऊ संरचना का निर्माण किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
