संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव DFO के खिलाफ वनकर्मियों ने खोला मोर्चा; तानाशाही के विरोध में निकाली विशाल रैली
उजाला टुडे कोंडागांव 11 मार्च 2026-कोंडागांव: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव वनमंडल में वन विभाग के अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। बुधवार को वनमंडल के कर्मचारियों ने DFO चूड़ामणि सिंह की कार्यशैली को “तानाशाही” करार देते हुए उनके खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरगी गार्डन से लेकर डीएफओ कार्यालय तक रैली निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रमुख आरोप: दबाव और मानसिक प्रताड़ना
मैदानी कर्मचारियों का आरोप है कि डीएफओ द्वारा उन पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने निम्नलिखित मुख्य बिंदु उठाए:
- दमनकारी नीतियां: फील्ड की विषम परिस्थितियों में काम करने के बावजूद वेतन रोकने और सर्विस रिकॉर्ड (CR) खराब करने की धमकियां दी जा रही हैं।
- अनावश्यक निगरानी: कर्मचारियों ने शिकायत की है कि किसी भी समय मोबाइल पर ‘लाइव लोकेशन’ मांगकर उनकी प्राइवेसी और कार्य स्वतंत्रता में दखल दिया जा रहा है।
- स्थानांतरण का डर: बात न मानने पर दूरदराज के इलाकों में तबादला करने की धमकी दी जाती है।
डीएफओ के व्यवहार से बढ़ा आक्रोश
हैरानी की बात यह रही कि घंटों इंतजार और नारेबाजी के बाद भी डीएफओ ज्ञापन लेने अपने चेंबर से बाहर नहीं आए। अधिकारियों के इस उदासीन रवैये ने आग में घी डालने का काम किया है। वन कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि होली के पूर्व समाधान का वादा किया गया था, लेकिन प्रशासन अपनी बात से मुकर गया है।
”यदि हमारी जायज मांगें नहीं मानी गईं और तानाशाही रवैया बंद नहीं हुआ, तो हम सभी बीट बस्ता जमा कर काम पूरी तरह बंद कर देंगे और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।” — छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ
आंदोलन का नेतृत्व
इस विरोध प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ की प्रांतीय पदाधिकारी सुशीला नेताम, मंडल अध्यक्ष चंदन सेठिया और उपाध्यक्ष अजय कुमार नाग सहित भारी संख्या में डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड शामिल हुए।
अगला कदम: कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक चेतावनी रैली थी; समाधान न होने पर समूचे वनमंडल में कार्य बहिष्कार की स्थिति निर्मित हो सकती है।
