संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव: लो-वोल्टेज और बिजली कटौती से किसानों में भारी आक्रोश, उग्र आंदोलन की चेतावनी
उजाला टुडे कोंडागांव 28 अप्रैल 2026- कोंडागांव: जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली की लचर व्यवस्था ने ग्रामीणों और किसानों का जीना मुहाल कर दिया है। ‘लुभा फीडर’ और ‘गारे फीडर’ के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार की जा रही अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज के कारण न केवल घरेलू कामकाज ठप हैं, बल्कि किसानों की फसलें भी बर्बाद होने की कगार पर हैं।
फसलों पर संकट: जल रहे हैं पंप, सूख रही है उम्मीद
गारे फीडर के अंतर्गत आने वाले ग्राम गारे, उडेंगा, जड़कोंगा, ओण्डरी, काटागांव और बुडरा के किसानों ने बताया कि भीषण गर्मी में लो-वोल्टेज की वजह से उनके विद्युत पंप जल रहे हैं। गर्मी की फसल के लिए कई किसानों ने बैंक से कर्ज लिया है, लेकिन बिजली की आंख-मिचौली के कारण फसलें पूरी तरह सूख रही हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे ऋण चुकाने की स्थिति में भी नहीं रहेंगे।
लुभा फीडर: राशन दुकानों से लेकर खेती तक सब ठप
इसी तरह की समस्या लुभा फीडर के गांवों (सोढ़सिवनी, गयापारा, सण्डसा, खुड़ी, उलेरा, तितना आदि) में भी बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग को बार-बार सूचना देने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा है। लो-वोल्टेज का आलम यह है कि सरकारी राशन दुकानों में मशीने काम नहीं कर रही हैं, जिससे लोगों को राशन मिलने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदनों में ग्रामीणों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
-
- समय सारणी में बदलाव: सुबह 5:00-6:00 और 8:00-9:00 के बीच होने वाली कटौती को तुरंत बंद किया जाए। साथ ही शाम 6:00 से 8:00 बजे की कटौती को बदलकर रात 10:00 बजे के बाद किया जाए।
- नए पावर हाउस का निर्माण: ग्राम पंचायत बालोंड में प्रस्तावित पावर हाउस का कार्य तत्काल शुरू किया जाए ताकि क्षेत्र को लो-वोल्टेज से मुक्ति मिल सके।
- नियमित आपूर्ति: किसानों की खड़ी फसल को बचाने के लिए बिना रुकावट बिजली सुनिश्चित की जाए।
“यदि प्रशासन ने हमारी इन मांगों पर तत्काल संज्ञान नहीं लिया और सुधार नहीं हुआ, तो हम सभी ग्रामीण और किसान उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।”
— ज्ञापन में उल्लेखित ग्रामीणों की सामूहिक चेतावनी
