संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
बस्तर: जनगणना 2026 में ‘आदिवासी धर्म’ कोड दर्ज कराने के लिए सर्व आदिवासी समाज ने कसी कमर
उजाला टुडे कोंडागांव 29 अप्रैल 2026-जगदलपुर। आगामी जनगणना 2026 को लेकर बस्तर संभाग के आदिवासी समाज ने अपनी विशिष्ट पहचान को रेखांकित करने के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ने का निर्णय लिया है। दिनांक 27 अप्रैल 2026 को सर्व आदिवासी समाज, बस्तर संभाग ने संभाग के सभी जिला अध्यक्षों, सचिवों और विभिन्न जनजातीय समाज प्रमुखों को पत्र जारी कर जनगणना के दौरान ‘आदिवासी धर्म’ दर्ज कराने का आह्वान किया है।
अस्तित्व और पहचान की लड़ाई
समाज के पदाधिकारियों द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जनगणना 2026 आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान और भविष्य के अधिकारों के निर्धारण के लिए एक निर्णायक अवसर है। समाज लंबे समय से अपनी प्रकृति-पूजक जीवनशैली और विशिष्ट संस्कृति के अनुरूप पृथक ‘आदिवासी धर्म कोड’ की मांग करता रहा है।
समाज को जारी किए गए प्रमुख निर्देश:
पत्र के माध्यम से समाज के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और परिवारों के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:
- धर्म कॉलम में प्रविष्टि: सभी परिवारों को जागरूक किया जाए कि वे जनगणना प्रपत्र के धर्म (Religion) वाले कॉलम में किसी अन्य धर्म के बजाय स्पष्ट रूप से ‘आदिवासी धर्म’ (या समाज द्वारा सर्वसम्मति से तय नाम) ही दर्ज कराएं।
- प्रशिक्षण एवं जागरूकता: ग्राम स्तर पर बैठकें आयोजित कर सदस्यों को समझाया जाए कि यदि प्रगणक (Enumerator) स्वयं से कोई धर्म लिखता है, तो उसका विरोध करें और अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए अपनी पसंद का धर्म दर्ज कराएं।
- युवाओं की भागीदारी: शिक्षित युवाओं को ‘स्वयंसेवक’ के रूप में तैयार किया जाएगा, जो गणना के समय बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे सदस्यों की सहायता करेंगे।
जल, जंगल, जमीन से जुड़ा है मुद्दा
सर्व आदिवासी समाज का मानना है कि आदिवासियों की विशिष्ट पहचान ही उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा का आधार है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि इस बार समाज अपनी संख्या और विशिष्ट धर्म को दर्ज कराने में चूक गया, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपनी पहचान बचाना कठिन हो जाएगा।
“आशा है कि आपके नेतृत्व में आपका समाज इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेगा और बस्तर की आदिम संस्कृति की मशाल को और प्रज्वलित करेगा।” – सर्व आदिवासी समाज, बस्तर संभाग
यह पत्र प्रकाश ठाकुर (अध्यक्ष) और तिमोथी लकड़ा (महासचिव) के नेतृत्व में जारी किया गया है, जो बस्तर संभाग के सभी सात जिलों (बस्तर, कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा) के लिए प्रभावी है।

