किरंदुल के पत्रकार डॉ. राजेंद्र सक्सेना ने रचा नया कीर्तिमान, विक्टोरिया यूनिवर्सिटी से मिली पीएचडी की प्रतिष्ठित उपाधि

उजाला टुडे न्यूज
18 जुलाई 2026
संवाददाता फलेश्वरी (रितु साहू)
किरंदुल। कहा जाता है कि “कलम केवल शब्द नहीं लिखती, वह इतिहास भी रचती है।” इस उक्ति को सार्थक करते हुए दंतेवाड़ा जिले के औद्योगिक नगर किरंदुल के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राजेंद्र सक्सेना ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न एवं भारत में संचालित विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ने उन्हें लिटरेचर एवं ह्यूमैनिटीज़ विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया है।
उत्तर प्रदेश के नोएडा में आयोजित 40वें अंतरराष्ट्रीय दीक्षांत समारोह में जैसे ही डॉ. राजेंद्र सक्सेना ने पीएचडी की उपाधि ग्रहण की, सभागार तालियों की गूंज से गूंज उठा। यह केवल एक सम्मान का क्षण नहीं था, बल्कि वर्षों की अध्ययनशीलता, साहित्य साधना, शोध के प्रति समर्पण और पत्रकारिता के प्रति उनकी निष्ठा का गौरवपूर्ण प्रतिफल था। उनकी यह उपलब्धि किरंदुल, दंतेवाड़ा और समूचे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा का विषय बन गई है।
समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. बीरेंन दबे (अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, आईसीडब्ल्यूसी) सहित विशिष्ट अतिथियों डॉ. नंद कुमार झा, डॉ. राम कृष्ण साह (संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि, यूएसए), एडवोकेट राजेंद्र वर्मा (वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय), डॉ. गोपाल दास (पूर्व आईएएस), एडवोकेट मोती प्रसाद, संत डॉ. सौरभ पांडेय (कुलपति, धरा धर्म इंटरनेशनल), प्रो. बृज गोपाल सिंह तथा एडवोकेट महेश नागर ने अपने करकमलों से उन्हें पीएचडी की उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी निष्पक्ष, सजग और समाजोन्मुख लेखनी से पहचान बनाने वाले राजेंद्र सक्सेना ने यह साबित कर दिया कि “ज्ञान और कर्म का संगम ही सफलता की सबसे मजबूत नींव होता है।” उनकी यह उपलब्धि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायी है, जो बस्तर के सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं। डॉ. राजेंद्र सक्सेना की इस उपलब्धि पर पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का वातावरण है।
पत्रकारिता, साहित्य, शिक्षा तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे किरंदुल की बौद्धिक पहचान और गौरव का सम्मान है। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपनी लेखनी, शोध और सामाजिक सरोकारों से आगे भी समाज को नई दिशा प्रदान करते रहेंगे ।

