संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
सड़क के साथ घुली प्यास: संवेदनशील क्षेत्र में PMGSY ठेकेदार की दरियादिली, कुँएमारी-भण्डारपाल में दो बोर खनन से ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत
उजाला टुडे कोंडागांव 27 अप्रैल 2026- कोंडागांव/केशकाल: बस्तर के बीहड़ और अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में विकास की बयार अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। केशकाल विधानसभा के नक्सल प्रभावित क्षेत्र कुँएमारी से भण्डारपाल तक बन रही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) की नई सड़क ने ग्रामीणों के लिए खुशियों के दोहरे द्वार खोल दिए हैं।
टापू बनने वाले क्षेत्र को मिलेगी ‘कनेक्टिविटी’
PMGSY चरण-04 के तहत बन रही करीब 4.5 किलोमीटर लंबी यह डामरीकृत सड़क इस इलाके की जीवनरेखा साबित होगी। सालों से बारिश के मौसम में यह क्षेत्र जिला मुख्यालय से कटकर ‘टापू’ बन जाता था। अब इस सड़क के पूर्ण होने से ग्रामीणों को:
- स्वास्थ्य सेवाएँ: एम्बुलेंस की गाँव तक सीधी पहुँच।
- शिक्षा: शिक्षकों और छात्रों के लिए सुगम आवागमन।
- राशन और बिजली: बुनियादी सरकारी सेवाओं की निरंतर आपूर्ति।
संकट में मसीहा बने ठेकेदार: निजी खर्च पर कराया बोर खनन
सड़क निर्माण का कार्य ठेकेदार गोविंद अग्रवाल द्वारा किया जा रहा है। निर्माण के दौरान जब भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर के कारण पानी का संकट गहराया, तो स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई। पुराने सरकारी बोरवेल ठप पड़े थे और ग्रामीण पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे थे।
मजदूरों और ग्रामीणों की परेशानी देख ठेकेदार ने सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) की मिसाल पेश करते हुए अपने निजी खर्च से दो स्थानों पर बोर खनन करवाया:
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- कुँएमारी स्कूल के पास
- भण्डारपाल ग्राम में
”पानी की किल्लत केवल काम में बाधा नहीं थी, बल्कि यह ग्रामीणों के जीवन का संघर्ष था। सड़क निर्माण के बाद भी ये बोरवेल यहाँ के लोगों की प्यास बुझाते रहेंगे, यही सोचकर हमने यह पहल की।”
— गोविंद अग्रवाल, ठेकेदार
ग्रामीणों में उत्साह: पूजा-पाठ के साथ शुरू हुआ काम
ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया। बोर खनन से पहले ग्रामीणों ने पूजा-पाठ कर अपनी खुशी जाहिर की। ग्रामीणों का कहना है कि जहां एक ओर सड़क से रास्ता सुगम होगा, वहीं इन नए बोरवेल से भीषण गर्मी में भी अब पीने के पानी की दिक्कत नहीं होगी।
अक्सर विकास कार्यों में केवल ईंट-पत्थर और डामर की चर्चा होती है, लेकिन कुँएमारी-भण्डारपाल मार्ग पर ठेकेदार की इस पहल ने साबित कर दिया है कि विकास तब और सार्थक हो जाता है जब उसमें जन-सरोकार जुड़ जाए। यह सड़क न केवल दो गांवों को जोड़ेगी, बल्कि विकास के प्रति विश्वास की नींव को भी मजबूत करेगी।
