संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
कोंडागांव में वाटरशेड योजना पर बवाल: काम से पहले वेंडरों को भुगतान, धरातल पर सिर्फ गड्ढे; किसानों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
उजाला टुडे कोंडागांव 08 जून 2026- कोंडागांव: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत संचालित माइक्रो वाटरशेड परियोजनाओं में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और निर्माण कार्यों में लेत-लतीफी का एक बड़ा मामला सामने आया है। कोंडागांव एवं बड़ेराजपुर विकासखंड के किसानों, ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत जल संरक्षण कार्यों की राशि धरातल पर काम दिखने से पहले ही मार्च महीने में वेंडरों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश कार्यस्थलों पर आज तक कोई प्रगति नहीं हुई है, जबकि कागजों पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
सरपंचों को अंधेरे में रखकर भुगतान का आरोप
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, कोंडागांव विकासखंड के ग्राम पंचायत मूलमुला, खड़का, नेवता, कोकोड़ी, छोटे बंजोड़ा और बड़ेराजपुर विकासखंड के बड़ेराजपुर, बालेंगा, सोनपुर, धमनपुरी एवं आमगांव सहित कई अन्य पंचायतों में स्टॉप डैम, चेक डैम, नाला बंधान और जल संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए थे।
आरोप है कि विभागीय साठगांठ के चलते संबंधित पंचायतों के सरपंचों और वाटरशेड समिति के सदस्यों को पूरी जानकारी दिए बिना ही, केवल समिति अध्यक्षों से बिल-वाउचर पर हस्ताक्षर कराकर आनन-फानन में भुगतान प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
स्थानीय मजदूर और ट्रैक्टर मालिक परेशान, बाहरी वेंडरों पर मेहरबानी
नियमों के मुताबिक, किसी भी योजना में स्थानीय मजदूरों और संसाधन प्रदाताओं का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में ठीक उल्टा हुआ। स्थानीय ट्रैक्टर संचालकों का आरोप है कि उन्होंने निर्माण स्थलों पर मिट्टी, गिट्टी और अन्य सामग्रियां पहुंचाईं, लेकिन उन्हें आज तक फूटी कौड़ी नहीं मिली है।
“जब हम अधिकारियों से अपने बकाए भुगतान की मांग करते हैं, तो वे टाल-मटोल करते हैं। बाहरी वेंडरों को पूरा पैसा मिल चुका है, लेकिन स्थानीय स्तर पर खून-पसीना बहाने वालों को चक्कर काटने पर मजबूर किया जा रहा है।”
— पीड़ित ट्रैक्टर संचालक
मानसून की दस्तक से किसानों की बढ़ी चिंता
किसानों का कहना है कि कई जगहों पर सिर्फ गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, तो कुछ जगहों पर थोड़ी-बहुत निर्माण सामग्री गिराकर केवल काम शुरू होने का नाटक किया गया है। अब जब मानसून आ चुका है, तो किसानों की चिंताएं दोगुनी हो गई हैं। अधूरे पड़े निर्माण कार्यों के कारण बारिश के पानी से खेतों की मिट्टी कटने, फसलों के नष्ट होने और भारी नुकसान की आशंका बनी हुई है।
RTI और अधिकारियों के जवाब पर संदेह का घेरा
ग्रामीणों ने जब इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा, तो उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इसके अलावा, पारदर्शिता के लिए सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांगने वाले आवेदकों का आरोप है कि उन्हें समय पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। विभाग की यह चुप्पी पूरे मामले में किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के पीड़ित किसानों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि:
- वाटरशेड योजना के तहत स्वीकृत सभी कार्यों की भौतिक स्थिति की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- वेंडरों को किए गए भुगतान और बिल-वाउचरों का ऑडिट हो।
- यदि वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक लापरवाही सिद्ध होती है, तो दोषी अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
नोट: यह समाचार ग्रामीणों, किसानों और शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले की वास्तविक सच्चाई सक्षम प्रशासनिक या न्यायिक जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।


