संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
पत्रकार सुरक्षा कानून के उल्लंघन के खिलाफ बस्तर में आक्रोश: जगदलपुर में पत्रकारों का एक दिवसीय धरना
उजाला टुडे कोंडागांव 15 जून 2026- जगदलपुर:बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आज पत्रकारों के दमन और उन पर सीधे एफआईआर दर्ज किए जाने के मामलों के खिलाफ ‘बस्तर जिला पत्रकार संघ’ के बैनर तले एक दिवसीय उग्र धरना-प्रदर्शन किया गया। पत्रकारों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज को दबाने की कोशिश की गई, तो आंदोलन और तेज होगा।
क्या है मुख्य विवाद?
धरने पर बैठे पत्रकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ लागू होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन द्वारा इसके नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हाल के कई मामलों में पत्रकारों के खिलाफ बिना किसी प्रारंभिक जांच के सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है, जो कि कानूनन गलत है।
क्या कहता है नियम?
पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी पत्रकार के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। मामले की शिकायत मिलने पर पहले डीएसपी (DSP) स्तर के अधिकारी द्वारा निष्पक्ष जांच की जानी अनिवार्य है। जांच में दोष सिद्ध होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
2023 से लागू है कानून, फिर भी अनदेखी
धरना स्थल पर मौजूद वरिष्ठ पत्रकारों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा कानून वर्ष 2023 से पूरी तरह लागू है और इसका विधिवत गजट नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी इस कानून के प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे बस्तर संभाग के पत्रकारों में भारी असंतोष और असुरक्षा का माहौल है।
बस्तर जिला पत्रकार संघ की प्रमुख मांगें:
- सख्ती से हो पालन: राज्य सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और पत्रकार सुरक्षा कानून के सभी नियमों व प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराए।
- सीधे FIR पर लगे रोक: बिना डीएसपी स्तर की जांच के पत्रकारों पर दर्ज की जा रही अवैध प्राथमिकियों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- सुरक्षा की गारंटी: बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले मीडियाकर्मियों को पूर्ण सुरक्षा और उनके अधिकारों का संरक्षण दिया जाए।
इस एक दिवसीय धरने में बस्तर जिले के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े भारी संख्या में पत्रकार साथी मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में सरकार से मांग की है कि पत्रकारों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

