संपादक, संजय सोनपिपरे उजाला टुडे कोंडागांव
स्वास्थ्य विभाग और पारंपरिक वैद्यों की अनूठी पहल: माकड़ी में ‘सिरहा गुनिया सम्मेलन’ का शानदार आयोजन
- मलेरिया उन्मूलन और मौसमी बीमारियों से जंग में अब ‘दवा और दुआ’ दोनों का मिलेगा साथ
- असामयिक मौतों को रोकने के लिए पारंपरिक सिरहा गुनिया और स्वास्थ्य अमला मिलकर करेंगे काम
उजाला टुडे कोंडागांव 03 जुलाई 2026-कोंडागांव/माकड़ी: शासन की मंशा के अनुरूप जिला कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना की पहल एवं मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला कोंडागांव के समस्त विकासखंडों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ब्लॉक एवं सेक्टर स्तर पर ‘सिरहा गुनिया सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 2 जुलाई को विकासखंड माकड़ी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रांगण में एक भव्य सम्मेलन संपन्न हुआ, जिसमें क्षेत्र के पारंपरिक वैद्यों (सिरहा गुनिया) को स्वास्थ्य जागरूकता की एक मजबूत कड़ी के रूप में जोड़ा गया।
पारंपरिक रीति-रिवाज से भव्य स्वागत और सम्मान
कार्यक्रम का शुभारंभ माकड़ी के प्रमुख माता पुजारी पूना राम मरकाम एवं अन्य वरिष्ठ सिरहा गुनिया द्वारा आराध्य देवी माता दंतेश्वरी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया। सम्मेलन में विकासखंड के विभिन्न गांवों से आए 90 प्रमुख सिरहा गुनिया और बैगाओं ने हिस्सा लिया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी पारंपरिक वैद्यों का तिलक लगाकर, पुष्पगुच्छ, नारियल और श्रीफल भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया।
‘दवा और दुआ’ के मेल से सुधरेगा ग्रामीण स्वास्थ्य
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश धरत एवं प्रभारी खंड विस्तार प्रशिक्षक अधिकारी देवराम नेताम ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बस्तर अंचल में पारंपरिक मान्यताओं के कारण ग्रामीण बीमार होने पर सबसे पहले गांव के सिरहा गुनिया या पुजारी के पास जाते हैं। जागरूकता की कमी से कई बार अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाती है।
“मरीज को दवा और दुआ दोनों की जरूरत होती है। यदि सिरहा गुनिया और स्वास्थ्य विभाग एक कड़ी के रूप में मिलकर काम करें, तो मैदानी स्तर पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहद सकारात्मक परिणाम मिलेंगे और असामयिक मौतों को रोका जा सकेगा।”
— स्वास्थ्य प्रबंधन, माकड़ी
मलेरिया मुक्त अभियान (14वां चरण) की दी गई जानकारी
सम्मेलन में उपस्थित वैद्यों को बताया गया कि वर्तमान में 15 जून से 14 जुलाई तक ‘मलेरिया मुक्त अभियान’ का 14वां चरण चल रहा है, जिसके तहत स्वास्थ्य टीमें डोर-टू-डोर सर्वे कर रही हैं।
- जांच और त्वरित इलाज: सर्वे के दौरान टेस्ट किट से मौके पर ही खून की जांच की जा रही है। मलेरिया पॉज़िटिव पाए जाने पर मरीज को तुरंत पहली खुराक स्वास्थ्य टीम के सामने खिलाई जा रही है, तथा शेष खुराक मितानिन व परिजनों की देखरेख में दी जाएगी।
- लक्षणों के प्रति सजगता: तेज बुखार, कंपकंपी, उल्टी, दस्त और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत मितानिन को सूचित करने की अपील की गई।
- बचाव के उपाय: घरों के आसपास सफाई रखने, मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने और कमरों में कीटनाशक दावों का छिड़काव कराने के लिए प्रेरित किया गया।
सर्पदंश, आयुष्मान कार्ड और अन्य बीमारियों पर विशेष जोर
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में बरसात के मौसम के कारण सर्पदंश , उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मामले बढ़ जाते हैं। इसके अलावा एनीमिया (खून की कमी), टीबी, कुष्ठ रोग और शुगर जैसी बीमारियों के लक्षण दिखने पर भी मरीजों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल रेफर करने में सहयोग मांगा गया।
साथ ही, सभी उपस्थित जनों को आयुष्मान भारत योजना की जानकारी देते हुए आयुष्मान कार्ड बनवाने और आधुनिक मशीनों से मिलने वाले मुफ्त इलाज का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित सभी सिरहा गुनिया ने स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान में पूर्ण सहयोग देने का संकल्प लिया।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति:
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान डॉ. भौमिक बारकर, मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर मनसुख सोरी, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक रघुनाथ नेताम, टीबी कार्यक्रम के कर्मचारी सहित ब्लॉक स्वास्थ्य विभाग का समस्त अमला उपस्थित रहा।




